पापा मेरा नाम लेकर मुठ मार रहे थे
जनवरी की ठंडी शाम थी, बाहर हल्की बारिश बूंदा-बांदी कर रही थी, समुद्र की नम हवा घर में घुसकर सबको छू रही थी, पंखे की हल्की गुनगुनाहट के साथ बारिश की टिप-टिप आवाज कानों में गूंज रही थी। मैं अपने कमरे में किताबों में डूबी थी, एसी बंद था, सिर्फ पंखा चल रहा था जो … Read more