Mami big boobs sex story: दोस्तों मेरा नाम आदर्श है। मेरी उम्र बाईस साल है। मैं इस वेबसाइट का बहुत बड़ा फैन हूँ। मैंने इस साइट पर बहुत सी सेक्सी कहानियाँ पढ़ी हैं। आज मैं अपनी एक सच्ची कहानी आप सभी को बताने जा रहा हूँ। यह कहानी एकदम सच्ची है और मैं उम्मीद करता हूँ कि आप सभी को यह बहुत पसंद आएगी।
अब मैं अपनी कहानी पर आता हूँ। दोस्तों मैं अपने घर में तीन भाइयों में सबसे छोटा हूँ। मेरे घर में माँ पापा और हम तीन भाई हैं। यह स्टोरी तब की है जब मैं बारहवीं के पेपर के बाद अपनी नानी के घर पर गया। मेरी नानी के घर पर नानी नाना बड़े मामा मामी उनके चार बच्चे और मेरे छोटे मामा जो गर्मियों में एक महीने के लिए आते हैं क्योंकि वो एयरफोर्स में काम करते हैं।
छोटे मामा के दो बच्चे हैं। बड़ी लड़की चार साल की है और छोटा बेटा एक साल का है। दोस्तों यह स्टोरी मेरी छोटी मामी के साथ हुई घटना पर आधारित है और मैं पहले आप सभी को अपनी मामी के बारे में बता देता हूँ। उनका नाम ऋतु है। वो एक हाउसवाइफ है और बहुत ही सुंदर है। उनका फिगर छत्तीस अट्ठाईस अड़तीस है और मुझे उनके बूब्स हमेशा से ही बहुत पसंद हैं।
वो अक्सर मेरे सामने ही अपने बच्चे को दूध पिलाया करती थी और मेरा सारा दिन उनके साथ बातें करते हुए ही बीता करता था। नानी का घर बहुत बड़ा तीन मंजिला है। उसमें दस कमरे हैं। मैं और मामी हमेशा पहली मंजिल पर ही रहते थे। बड़े मामा ज्यादातर मार्केट में या खेतों पर घूमने चले जाते थे और बाकी लोग नीचे की मंजिल पर ही रहते थे।
फिर इस बार जब मैं वहाँ पर पहुँचा तो मुझे पता चला कि दोनों मामा बड़ी मामी नानी और बड़े मामा के बच्चे ये सारे लोग पास के गाँव में किसी रिश्तेदार की शादी में जा रहे हैं। मैं बहुत खुश था क्योंकि मुझे मामी के साथ अब और समय बिताने का मौका मिलने वाला था। घर पर नाना मामी मामी के बच्चे मैं और बड़ी मामी की बेटी दिव्या जो की अठारह साल की है सिर्फ हम लोग ही रुकने वाले थे।
फिर अगले दिन सभी लोग शादी में चले गए और अब वो चार पाँच दिन बाद ही आने वाले थे। मेरे नाना ज्यादातर खेतों में ही रहते थे और दिव्या अपनी आगे की पढ़ाई करने में व्यस्त रहती थी। फिर मैं सभी को बस स्टेशन छोड़कर घर वापस पहुँचा तो मैंने देखा कि मामी नहाने गई हुई थी और दिव्या टीवी देख रही थी। तो मैं सीधे मामी के कमरे में चला गया और मुन्ने और गुड़िया के साथ खेलने लगा।
फिर मामी बाथरूम से साड़ी में भीगे हुए बालों को सुखाते हुए कमरे में आई और गुड़िया से अपनी चोटी बंधवाई। मामी ने पूछा क्या मस्ती हो रही है भैया के साथ। मैंने कहा अरे मामी कुछ नहीं ऐसे ही हम लोग बस मुन्ने के साथ खेल रहे हैं। मामी ने गुड़िया से कहा जा जरा दीदी से बोल कि नाश्ता लगा ले। गुड़िया झट से चली गई और मामी मेरे पास आकर बैठ गई और अपना हाथ मेरे कंधे पर रख दिया।
वो अक्सर ऐसे ही बैठती थी और मुझे भी बहुत अच्छा लगता था। लेकिन कभी भी मैंने उनके बारे में गलत नहीं सोचा था। मुझे उनके बूब्स तो हमेशा से ही बहुत पसंद थे क्योंकि मैं एक मर्द हूँ। तो ना चाहते हुए भी उन्हें देखना पड़ता था। फिर मैंने मामी से बोला कि मुन्ने को भूख लगी है और मामी तुरंत मुन्ने को गोद में लेकर दूध पिलाने लगी। मैं उनके बूब्स को देखता रहा और मामी ने यह बात हमेशा नोटिस की। लेकिन वो मुझे अपने बच्चे जैसा मानती थी। हालाँकि वो मुझसे दस साल ही बड़ी थी।
मामी को हमेशा से ही पता था कि मैं उनके बूब्स को देखता हूँ और वो यह बात जानते हुए भी कभी भी उन्हें नहीं छुपाया करती थी। मामी हमेशा से ही मुझसे बहुत ही खुलकर बातें करती थी। लेकिन मैं ही समझता नहीं था और हमेशा शरमाता रहता था। फिर मामी ने मुझसे बोला कि आदर्श क्या देख रहा है। तो मैंने कहा कि मुन्ने को देख रहा हूँ। क्या वो सो गया। तो मामी ने हँसते हुए बोला कि सच्ची में सो गया है और मुझसे बोली कि क्या तेरी कोई प्रेमिका नहीं है।
मैंने कहा नहीं मामी मैंने कभी बनाने के बारे में सोचा ही नहीं। मामी ने पूछा ऐसा क्यों। मैंने कहा मुझे लड़कियों से बात करना पसंद नहीं है। मामी ने कहा लेकिन तुम मुझसे तो बहुत अच्छे से बात करते हो और लड़कियों से बात करना पसंद नहीं है या फिर शरमाते हो। मैंने कहा कुछ ऐसा ही लेकिन आपसे तो मैं बात कर ही सकता हूँ ना क्योंकि आप भी मुझसे बात करती हो। मामी ने कहा अच्छा तो तू चाहता है कि कोई लड़की खुद तुझसे बात करने आए। मैंने कहा मैंने ऐसा कहाँ बोला।
मामी ने कहा मैं सब समझती हूँ। मैंने पूछा क्या समझती है आप। मामी ने कहा तू बाहर से बहुत शर्मीला है लेकिन अंदर से कुछ और ही है। मैंने पूछा क्या मतलब मामी। मामी ने कहा तू हमेशा मुझे घूर घूरकर देखता है ना और जब मैं बच्चे को दूध पिलाती हूँ तो तेरी निगाहें बस वहीं टिकी रहती हैं। फिर मैं कुछ ना बोल सका और शांति से गर्दन नीचे करके बैठा रहा।
मामी ने कहा अरे शरमाता क्यों है। तुम तो मेरे बच्चे जैसे हो ना और तुम वो देखते हो इस पर मुझे कोई आपत्ति नहीं लेकिन तुम इतना शरमाते हो उस पर मुझे बहुत हँसी आती है। मैंने कहा तो मैं क्या करूँ मामी मैं ऐसा ही हूँ। मामी ने कहा तो शादी के बाद भी ऐसा ही रहेगा क्या। मैंने पूछा क्या मतलब। मामी ने कहा मेरा मतलब है कि क्या तू अपनी शादी के बाद अपनी बीवी को भी ऐसे ही देखेगा।
मैंने कहा नहीं मामी वो तो जब शादी होगी तब देखा जाएगा। मामी ने कहा अच्छा बच्चे ठीक है मैं तेरी मम्मी को बोल देती हूँ कि आदर्श की जल्दी से शादी कर दे नहीं तो वो ऐसे ही लड़कियों को छुपकर देखता रहेगा। मैंने कहा मामी आप भी ना। तभी दिव्या ने आवाज दी कि चाची नाश्ता तैयार है और हम मुन्ने को सुलाकर नीचे नाश्ता करने चले गए।
मामी ने दिव्या से कहा दिव्या क्या तुझे एक बात पता है। दिव्या ने कहा वो क्या चाची। मामी ने कहा तेरे आदर्श भैया लड़कियों को छुप छुपकर देखते हैं और ऐसे ही जी भरते हैं। मैंने कहा आप भी ना मैंने ऐसा क्या किया है। दिव्या ने कहा क्यों भैया आप तो बड़े छुपेरुस्तम हो। फिर ऐसा बोलकर वो दोनों हँसने लगीं और मैं शरम के मारे शांत रहा और नाश्ता करके चुपचाप उठकर चला गया।
दोपहर में मामी मेरे पास आई और बोली तू मुझसे इतना नाराज क्यों है। मैंने कहा आपने दिव्या के सामने ऐसी बात क्यों की। मामी ने कहा दिव्या को भी तेरी यह बात पता है क्योंकि तू उसे भी ऐसे ही देखा करता है और इसलिए मैंने तुझे बचाने के लिए ऐसा मजाक किया। फिर मैं और शर्मिंदा हो गया।
मामी ने कहा देख तू ऐसे क्यों शर्मिंदा हो रहा है। मैंने कहा तो क्या करूँ मैं अपनी नजरों पर काबू नहीं कर पाता हूँ और मेरी किसी भी लड़की से बात करने की हिम्मत भी नहीं होती। मामी ने कहा तो इसमें इतनी टेंशन क्यों ले रहा है। मैंने तो बस मजाक किया था अगर मैं तुम्हारी कुछ मदद कर सकूं तो मुझे बताओ। मैंने पूछा आप मेरी क्या मदद कर पाओगी।
मामी ने कहा तू एक बार बोल तो सही तेरी सारी परेशानियाँ मैं बिल्कुल समाप्त कर दूंगी। मैंने कहा लेकिन आप ऐसा क्या करोगी। मामी ने कहा मैं तेरी प्रेमिका बन जाती हूँ और तू मुझसे अपनी प्रेमिका जैसे ही बातें किया कर। मैंने कहा यह क्या बोल रही हो आप। मामी ने कहा क्यों तुझे मैं पसंद नहीं हूँ क्या जो तू मुझे अपनी प्रेमिका नहीं बना सकता।
मैंने कहा ऐसी कोई बात नहीं मामी लेकिन मैंने आपके लिए कभी ऐसा नहीं सोचा। मामी ने कहा तो उसमें क्या है। मैं एक लड़की हूँ ना और तू मुझसे बातें भी करता है अब यह सोच ले कि मैं तेरी प्रेमिका हूँ और बस इसमें क्या गलत है। मैंने कहा ठीक है मामी लेकिन मैं आपके साथ प्रेमी प्रेमिका वाली बातें कैसे करूँगा।
मामी ने कहा हाँ यह तो समस्या है लेकिन मेरे पास इसका भी हल है। मैंने पूछा वो क्या। फिर वो अंदर अपने कमरे में चली गई और मैं भी उनके पीछे पीछे चला गया और जैसे ही वो कमरे में पहुँची मामी ने कहा कि दरवाजा बंद कर दे। मैंने कहा वो क्यों। मामी ने कहा तू सवाल बहुत करता है बस मैं जो बोलती हूँ वो चुपचाप कर। मैंने कहा ठीक है करता हूँ।
मामी ने कहा आजा इधर मेरे पास। फिर मैं चला गया और उन्होंने अचानक मुझे पीछे से पकड़ लिया। वो अक्सर ऐसा करती थी लेकिन इस बार बात कुछ और थी। मैंने कहा क्या हुआ मामी आप यह क्या कर रही हो। मामी ने कहा मैं तेरी प्रेमिका हूँ ना तो यह सब तो कर ही सकती हूँ। तो ऐसा बोलकर वो मेरे सामने आई और मेरे होंठों पर अपने होंठ रखकर किस करने लगी। मेरे साथ ऐसा पहली बार हो रहा था और मुझे बहुत मजा आ रहा था।
मैंने कहा मामी आप ऐसा क्यों कर रही हो। मामी ने कहा तेरी खातिर और तेरी इस शरम को दूर करने के लिए। मैंने कहा लेकिन यह सब सही नहीं है। मामी ने कहा ना हो लेकिन तेरे लिए यह बहुत अच्छा है। फिर इतने में ही मेरा लंड खड़ा हो गया और मामी ने अपना हाथ तुरंत उस पर रख दिया और मैं पागल हुए जा रहा था। फिर मामी ने अपना ब्लाउज खोल दिया और उनकी चूचियाँ बाहर कूद पड़ीं। तो मैंने अपना हाथ झट से उनके ऊपर रख दिया और दबाने लगा।
मामी ने पूछा क्यों मेरी चूचियाँ कैसी लगीं। मैंने कहा बहुत मस्त हैं मामी। मामी ने कहा तो फिर क्या इनका दूध पीना नहीं चाहोगे। तो मैंने तुरंत एक बूब्स के निप्पल को मुँह में ले लिया और चूसने लगा और दूसरे बूब्स को सहलाने लगा। मामी ने कहा आराम से बाबा अब यह तुम्हारे ही हैं जितना चाहे उतना चूसो चाहो तो आज इनको बिल्कुल खाली कर दो।
फिर मैं दोनों चूचियों को बारी बारी से चूसता रहा और दूध पीता रहा और करीब पंद्रह मिनट बाद चूची खाली हो गई। अब मामी ने मेरे सात इंच के लंड को मेरी पैंट से बाहर निकालकर अपने हाथ में ले लिया और अपने हाथ को आगे पीछे करके सहलाने लगी और फिर मैं थोड़ी ही देर में झड़ गया। तो मामी ने बोला अभी के लिए बस इतना ही आगे का काम रात में करेंगे।
फिर मैं रात होने का इंतजार करने लगा और खाना हम सबने एक साथ खाया और अपने अपने कमरे में सोने के लिए चले गए और मैं मामी के साथ बातें कर रहा था और सबके सोने का इंतजार कर रहा था। तभी लाइट चली गई और गर्मी की वजह से हम छत पर चले गए और वहाँ पर हमने दो गद्दे लगाए और उस पर लेट गए। तभी मामी ने बोला कि अब आगे का काम किया जाए। तो मैं तुरंत उनके ऊपर आ गया और उनकी चूचियाँ दबाने लगा।
फिर मामी ने मेरा लंड अपने हाथों में ले लिया और बोली कि मुझे तेरे लंड को चखना है और फिर वो लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी। तो मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कि वो लॉलीपॉप चूस रही हो और उन्होंने लंड को चूस चूसकर उसका पानी निकाल दिया और सारा गटक गई। मेरा लंड बिल्कुल शांत होकर बैठ गया। तो मामी ने कहा कि ले दूध पी ले तेरा लंड फिर से खड़ा हो जाएगा और ऐसा बोलते हुए उन्होंने अपनी चूची मेरे मुँह में डाल दी और मेरा लंड थोड़ी ही देर में फिर से खड़ा हो गया।
मामी के मुँह से अजीब अजीब सी आवाजें आने लगीं आह्ह उुई चूस ले मेरे राजा और जोर जोर से साँसें लेने लगीं और अब हम दोनों पूरे नंगे हो गए और मामी ने मेरा एक हाथ पकड़कर अपनी चूत पर रख दिया और मैं देर ना करते हुए उसे रगड़ने लगा। मैंने नीली फिल्म में यह सब देखा हुआ था इसलिए यह सब करने में ज्यादा समस्या नहीं हुई। फिर ऐसे ही हमने दस मिनट तक एक दूसरे को गरम किया और फिर मामी ने बोला कि अब और मत तड़पाओ चोद दो मेरी चूत को।
तो मैंने अपने लंड को चूत पर रखा और एक ही झटके में पूरा लंड अंदर डाल दिया और जोर जोर से ताबड़तोड़ धक्के देकर चोदने लगा और साथ ही साथ चूचियों को भी दबाता रहा और मामी के रसीले होंठ का रस भी चूसता रहा। फिर बीस मिनट चोदने के बाद मैंने अपना वीर्य उनकी चूत में डाल दिया और हम दोनों ही एक साथ झड़ गए और जब हमारा चुदाई का नशा खत्म हुआ और हमने नजरें उठाकर देखा तो दिव्या वहाँ पर खड़ी होकर हमारी चुदाई का खेल देख रही थी।
तो मैं बहुत डर गया और तुरंत अपने कपड़े लेकर खड़ा हो गया। तभी मामी ने कहा कि क्या हुआ इतना डर क्यों रहा है। इसे मैंने ही बोला था और यह भी अब जवान हो रही है। तो इसे भी सब पता होना चाहिए कि चुदाई कैसे की जाती है लंड कैसे लेना चाहिए। तो मैं मामी की तरफ देखते हुए मुस्कुराया और बोला कि मामी आपने तो सच में मेरी समस्या हल कर दी। दोस्तों यह मेरी सच्ची कहानी थी जो कि आज से छह साल पहले हुई थी लेकिन अब मैं दिव्या और मामी की एक साथ चुदाई करता हूँ और वो दोनों भी मजे से दिल खोलकर चुदवाती हैं।