हेलो दोस्तों, मैं संदीप आज आप सभी लोगों के सामने पेश हूँ अपनी एक सच्ची सेक्स की घटना लेकर। इसमें मैं आज आप सभी को बताऊंगा कि कैसे मैंने अपने कजिन की शादी में उसके पड़ोस में रहने वाली एक सेक्सी लड़की को अपनी बातों में फंसाकर चोदा और उसे अपनी चुदाई से पूरी तरह संतुष्ट किया।
दोस्तों, मैं गांधीधाम का रहने वाला हूँ। मेरा शहर गर्म और धूल भरा है लेकिन गांव जाने का मौका मिलना मेरे लिए बहुत रोमांचक था। कुछ समय पहले मुझे पता चला कि हमारे पास के एक गांव में मेरे कजिन की शादी है। शादी की यह खबर सुनते ही मेरे मन में खुशी की लहर दौड़ गई। मैंने तुरंत अपने भाई और मामी को तैयार किया। इसलिए मैं, मेरा भाई और मेरी मामी शादी से चार दिन पहले ही चले गए। रास्ते में हम बस से यात्रा कर रहे थे। गांव की हरियाली और ताजी हवा ने मुझे और भी उत्साहित कर दिया। वहां पर पहले से कई करीबी रिश्तेदार भी आ गए थे। घर के चारों तरफ शादी की तैयारियां जोरों पर चल रही थीं। मिठाइयों की खुशबू और फूलों की महक पूरे माहौल को रोमांचक बना रही थी।
फिर मैं और मेरा भाई ऐसे ही चक्कर मारने निकल पड़े। दोपहर की तेज धूप में हम सड़क पर घूम रहे थे। हमारे कपड़ों पर धूल लग रही थी लेकिन मन हल्का था। कुछ दूरी चलने के बाद हमें कुछ मकान छोड़कर पास वाले एक घर में एक जबरदस्त लड़की दिखी। वाह, क्या मस्त सेक्सी लग रही थी। उसकी सांवली त्वचा धूप में हल्का पसीना लेकर चमक रही थी। उसके बाल थोड़े खुले थे और हवा में लहरा रहे थे। उसके बड़े स्तन ब्लाउज में बहुत तंग और उभरे हुए लग रहे थे। जैसे ही मेरी नजर उसके फिगर पर पड़ी मेरे शरीर में गर्मी की लहर दौड़ गई। वो मुझसे करीब तीन चार साल बड़ी लग रही थी, लेकिन उसका साइज देखकर मेरा लंड नाचने लगा। मेरा लंड पैंट के अंदर अचानक सख्त होकर फूलने लगा। मुझे उसकी कल्पना आने लगी कि उसकी चूत कितनी गर्म और तंग होगी। मैंने सोचा कि मैं उसकी बड़ी गांड को पकड़ कर कैसे जोर जोर से चोदूंगा। उसके फिगर का साइज करीब अड़तीस बत्तीस छत्तीस होगा और वो कलर में थोड़ी सांवली थी। उसकी पतली कमर और भरे हुए कूल्हे देखकर मेरा लंड और भी जोर से धड़कने लगा। उसके स्तनों की गहराई मुझे देखने को मजबूर कर रही थी।
मैंने पहली बार देखकर उसे स्माइल दी। मेरी मुस्कान में मेरी छुपी हुई कामना थी। फिर मुझे उसकी तरफ से इतना कुछ खास जवाब नहीं मिला। वो थोड़ी शर्मीली नजर आई लेकिन गुस्सा नहीं था। मैं थोड़ा आगे की तरफ चला गया। मेरा मन अभी भी उसकी याद में डूबा हुआ था। मेरे कदम धीमे थे क्योंकि मैं बार बार पीछे मुड़ कर देख रहा था।
फिर मुझे पता चला कि जिस कजिन की शादी है, यह लड़की उसकी सहेली है क्योंकि वो घर में बहुत आना जाना कर रही थी। यह बात सुनकर मेरे मन में नई उम्मीद जागी। अब मुझे उसके साथ बात करने का बहाना मिल गया था। इसलिए मैं बस अब उससे थोड़ी नजर मिलाने लगा, लेकिन अब मुझे उसकी तरफ से अच्छा जवाब मिलने लगा था। उसकी आंखें अब मेरी आंखों में सीधे टिकने लगी थीं। वह भी मुस्कुरा कर जवाब देने लगी। हमारी नजरों की यह खींचतान धीरे धीरे बढ़ती जा रही थी।
फिर मैं बस थोड़ी बहुत बात करने लगा था। हमारी बातें पहले हल्की थीं लेकिन धीरे धीरे गहरी होने लगीं। शाम को जब मैं छत पर गया तो मैंने देखा कि वो भी पास वाली छत पर थी और अब हम दोनों बातें करने लगे। छत पर ठंडी हवा चल रही थी। सूरज ढल रहा था और आसमान नारंगी हो रहा था। उसका नाम सीमा था। उसके नाम का उच्चारण सुनकर मुझे और भी अच्छा लगा। मुझे उससे बात करते करते पता चला कि वो मुझसे करीब दो साल बड़ी थी। उसकी उम्र सुनकर मेरे मन में और भी कामुक विचार आने लगे। वह अपनी बातें हंसते हुए कह रही थी। उसके होंठ हिलते देखकर मुझे चूमने की इच्छा हो रही थी।
फिर रात को जब हम सोने जा रहे थे तो मामा ने मुझसे कहा कि हमारी छत पर आज बिल्कुल भी जगह नहीं है और तुम पास वाली छत पर जाकर सो जाना। उनके शब्द सुनते ही मेरे पूरे शरीर में बिजली की लहर दौड़ गई। मेरा लंड तुरंत खड़ा होकर जोर से धड़कने लगा। मैंने कल्पना की कि रात भर मैं उसके बगल में लेटा रहूंगा। दोस्तों, उनके मुंह से यह बात सुनकर मेरे मन में लड्डू फूटने लगे थे। मैं तुरंत अपने लिए बिस्तर लेकर पास वाली छत पर चला गया। मेरे कदम तेज थे और दिल जोर जोर से धड़क रहा था। मैं सीढ़ियां चढ़ते हुए सोच रहा था कि आज रात कुछ खास होने वाला है।
फिर मैंने वहां पहुंचकर देखा कि वो भी उस समय ऊपर ही सो रही है। उसकी शरीर की आकृति चादर में साफ उभर रही थी। उसके स्तन की गोलाई और कमर की पतली रेखा दिख रही थी। वैसे दोस्तों हमारे अलावा कुछ और भी लोग वहां पर थे। वे दूर की तरफ सो रहे थे और उनकी सांसों की आवाज आ रही थी। फिर मैंने अपना बिस्तर उसके पास ही लगा लिया। हमारे दोनों बिस्तर एक दूसरे से बहुत करीब थे। अगर मैं हाथ बढ़ाता तो उसका शरीर छू सकता था। बातों ही बातों में उसने मेरा मोबाइल ले लिया। उसके नरम हाथ मेरे फोन को छू रहे थे। उसके स्पर्श से मेरे शरीर में और गर्मी फैल गई।
पहले मुझे थोड़ा सा डर लगने लगा था क्योंकि मैंने ब्लू फिल्म बंद नहीं की थी। मेरे मन में डर और उत्साह दोनों एक साथ थे। मैंने सोचा कि अगर उसने स्क्रीन देख ली तो क्या होगा। मेरे मन में वह ब्लू फिल्म का सीन घूम रहा था। उस फिल्म में एक मोटा लंड एक गीली चूत में जोर जोर से घुस रहा था। लड़की जोर जोर से चीख रही थी और कह रही थी हां और जोर से चोदो। अब मैंने सोने का नाटक किया।
फिर जब एक बज रहे थे तो मुझे नींद में ही उसकी सिसकियों की आवाज आ रही थी। रात का सन्नाटा चारों तरफ छाया हुआ था। केवल दूर से झींगुरों की आवाज और हल्की हवा की सरसराहट सुनाई दे रही थी। अचानक मेरे कानों में उसकी सिसकियों जैसी आवाज घुसने लगी। वो आवाज नींद में भी मुझे खींच रही थी।
जब मैंने थोड़ी आंख खोली तो देखा कि वो मेरे फोन पर ब्लू फिल्म बिना आवाज के देख रही थी और उसका एक हाथ नीचे उसके कपड़ों के अंदर था। चांदनी की हल्की रोशनी छत पर पड़ रही थी। उसका चेहरा फोन की स्क्रीन की रोशनी में साफ दिख रहा था। उसकी आंखें फिल्म पर टिकी हुई थीं। उसके होंठ हल्के से कांप रहे थे।
दोस्तों, मैं तुरंत समझ गया कि अब वो फिल्म देखकर बहुत जोश में आ चुकी है और अपनी गरम चूत में उंगली कर रही है। उसके हाथ की हरकत कपड़ों के अंदर साफ दिख रही थी। उसकी उंगलियां धीरे धीरे ऊपर नीचे हो रही थीं। उसके शरीर में हल्की हल्की सनसनाहट दौड़ रही थी। उसकी सांसें भारी हो चुकी थीं।
मैंने देखा कि उसकी उंगलियां उसकी गरम चूत के अंदर घुस रही थीं। वो उंगलियों को अंदर बाहर कर रही थी। उसके कूल्हे हल्के से हिल रहे थे। उसके स्तन ऊपर नीचे हो रहे थे। उसके मुंह से कभी कभी बहुत धीमी सिसकारी निकल रही थी।
फिर मैंने कुछ नहीं किया और सो गया। मैंने आंखें बंद कर लीं लेकिन मन शांत नहीं हो रहा था। मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो चुका था। वो लंड पैंट के अंदर जोर जोर से धड़क रहा था। मैं उसकी हर हरकत को महसूस कर रहा था।
अगली रात को मैंने फिर से उसे अपना मोबाइल दे दिया और दोबारा से सोने का नाटक करने लगा। मैं जानबूझकर फिल्म को फिर से खोलकर रख दिया था। वो चुपचाप फोन ले चुकी थी। मैंने आंखें बंद कर लीं लेकिन कान खुले रखे। रात फिर से गहरी हो चुकी थी।
फिर कुछ देर बाद वो दोबारा मेरे मोबाइल पर फिल्म देखकर अपनी चूत में उंगली करने लगी थी। उसकी सिसकारियां पहले से ज्यादा तेज हो गई थीं। उसके हाथ की रफ्तार बढ़ चुकी थी। उसकी चूत से निकलने वाली गीली आवाज बहुत धीमी लेकिन साफ सुनाई दे रही थी। उसके शरीर में पसीना आ चुका था।
फिर क्या था, जब वो कुछ देर बाद झड़कर बिल्कुल शांत हो गई तो मैंने चुपके से उसके कान के पास जाकर उससे बोला कि तुम यह क्या कर रही थी? उसके शरीर में अचानक कंपकंपी आ गई। उसकी सांस रुक सी गई। मैंने अपने गर्म सांस उसके कान पर मारी। उसके कान के पास मेरी सांस की गर्माहट पड़ रही थी।
तो वो अचानक से मुझे अपने पास देखकर और मेरे मुंह से यह बात सुनकर एकदम से डर गई थी। उसकी आंखें बड़ी हो गईं। उसका शरीर जड़ सा हो गया। उसके चेहरे पर डर और शर्म दोनों साफ दिख रहे थे। उसके होंठ कांपने लगे।
फिर उसने मुझसे कहा कि प्लीज धीरे बोलो वरना किसी ने सुन लिया तो बहुत बड़ी समस्या हो जाएगी। उसकी आवाज कांप रही थी। वो बहुत धीरे से बोल रही थी। उसकी सांसें अभी भी भारी थीं। उसके शरीर से हल्की सी गर्माहट निकल रही थी।
फिर मैंने उससे बोला कि मैं नीचे पानी पीने जा रहा हूँ, तुम मुझे वहां पर मिलो। मैंने धीरे से उठकर बिस्तर से बाहर निकल लिया। मेरे कदम बहुत सावधानी से थे। मैं सीढ़ियों की तरफ बढ़ने लगा। मेरे पीछे उसकी उपस्थिति महसूस हो रही थी।
अब वो एकदम चुपचाप मेरे पीछे पीछे नीचे आ गई। उसके नंगे पैर फर्श पर हल्की आवाज कर रहे थे। अंधेरा चारों तरफ था। सीढ़ियों पर ठंडी हवा चल रही थी। उसके शरीर की गर्माहट मेरे पीछे महसूस हो रही थी।
फिर मैं आगे आगे नीचे जाने लगा और वो आ गई। हम दोनों चुपचाप नीचे उतर रहे थे। घर में हर कोई सोया हुआ था। केवल हम दोनो की सांसों की आवाज सुनाई दे रही थी। मेरा लंड अभी भी सख्त था।
अब वो मेरे सामने शर्म से अपना सर नीचे झुकाकर खड़ी हुई थी।
फिर मैंने उससे कहा कि तुम मुझसे बिल्कुल भी मत डरो। मेरी आवाज बहुत धीमी और प्यार भरी थी। मैंने उसकी आंखों में सीधे देखते हुए कहा कि मैं किसी को कुछ भी नहीं बताऊंगा। यह बात हमेशा हम दोनों के बीच में रहेगी। लेकिन अगर तुम मेरा साथ दो तब ऐसा हो सकता है।
मैंने उसका एक हाथ पकड़ लिया। उसके हाथ में हल्का सा पसीना था। उसकी उंगलियां थोड़ी कांप रही थीं। मैंने उसे एक स्माइल दी। वो भी मेरी तरफ हंसने लगी।
दोस्तों, अब मैंने उस अच्छे मौके का फायदा उठाया और उसे तुरंत हग कर लिया। मैंने उसे अपने सीने से चिपका लिया। उसके स्तन मेरे सीने से दब गए। उसकी गरम सांस मेरे गले पर पड़ रही थी। वो पहले मुझसे मना करके दूर हटने लगी।
उसने अपने शरीर को थोड़ा पीछे खींचने की कोशिश की। लेकिन मैंने उसे और मजबूती से पकड़ लिया। फिर मैंने उससे कहा कि अब ज्यादा नाटक मत करो वरना मैं सभी लोगों को सब कुछ सच सच बता दूंगा कि तुम क्या कर रही थी। मेरी आवाज में थोड़ी सख्ती थी। उसके शरीर में अचानक जकड़न आ गई।
फिर उसने कहा कि प्लीज तुम्हें जो कुछ भी करना है करो, लेकिन किसी को कुछ भी बताना मत वरना मेरी बहुत बदनामी होगी और मेरे घर वाले मुझे बहुत मारेंगे। उसकी आवाज कांप रही थी। उसकी आंखों में डर साफ दिख रहा था। वो मेरे सीने से सटकर खड़ी थी। उसके शरीर से हल्की सी गर्माहट निकल रही थी।
दोस्तों, अब मुझे उसकी तरफ से ग्रीन सिग्नल मिल गया जिसको देखकर मैं मन ही मन बहुत खुश हो गया। मेरा लंड अब और भी सख्त हो चुका था। वो मेरी पैंट के अंदर जोर जोर से धड़क रहा था। मैंने उसे किस करते हुए हग किया। हम लोग उस समय बहुत अंधेरे में खड़े हुए थे।
उस समय सभी लोग सो भी चुके थे इसलिए कोई भी हमें नहीं देख पा रहा था। मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। उसके होंठ नरम और गर्म थे। मैंने धीरे से उसके होंठ चूसने शुरू कर दिए। उसके शरीर में हल्की सी सनसनाहट दौड़ रही थी।
फिर कुछ देर बाद मैंने महसूस किया कि वो भी अब हल्की हल्की गरम होने लगी थी। उसने अपनी जीभ मेरी जीभ से मिला दी। उसकी सांसें भारी हो रही थीं। वो अब मेरे हग से दूर नहीं हट रही थी। उसके शरीर की गर्मी मेरे पूरे शरीर में फैल रही थी।
फिर मैंने कुछ देर पैंटी के ऊपर से ही चूत को सहलाया और छूकर उसकी गर्मी को महसूस किया। मेरी उंगलियां उसके कपड़ों के ऊपर से घूम रही थीं। उसकी चूत की गर्माहट मेरी उंगलियों तक पहुंच रही थी। वो हल्के हल्के से कांप रही थी। मैंने उसकी चूत के ऊपर धीरे से दबाव डाला।
फिर जैसे ही कुछ देर बाद मैंने उसकी पैंटी में अपना हाथ डाला तो मैंने महसूस किया कि वो तो पहले से ही बिल्कुल गीली थी। उसकी चूत से चिपचिपा रस निकल रहा था। मेरी उंगलियां उसकी गीली चूत के होठों पर फिसल रही थीं। वो पहले से ही बहुत गर्म और चिकनी थी। उसकी चूत की महक मेरी उंगलियों पर लग चुकी थी।
फिर बस थोड़ी देर चूत पर अंदर बाहर हाथ घुमाने के बाद मैंने उससे कहा कि कल रात को तुम मुझे फिर से मिलना। मैंने अपनी मध्यमा उंगली उसकी चूत के अंदर धीरे से घुसा दी। उसकी चूत बहुत तंग और गीली थी। मैंने उंगली को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया। उसके शरीर में हल्की सिसकारी निकल रही थी।
उसने मेरे कंधे को थोड़ा जोर से पकड़ लिया। उसकी चूत मेरी उंगली को चूस रही थी। मैंने उसकी चूत के अंदर उंगली घुमाते हुए उसके क्लिट को भी छुआ। वो अब पूरी तरह से मेरे हाथ में थी। उसकी सांसें बहुत तेज हो चुकी थीं।
फिर वो वहां से चली गई। उसके कदम थोड़े लड़खड़ा रहे थे। मैं अब बस अगली रात होने का इंतजार कर रहा था। मेरा वो दिन बहुत मुश्किल से निकला और मैं पूरे दिन उसकी चूत और बूब्स के बारे में सोचता रहा। मेरा बहुत बुरा हाल था।
मैं बार बार उसकी गीली चूत की याद में खो जाता था। मेरा लंड दिन भर सख्त रहता था। मुझे हर वक्त लगता था कि मैं उसे फिर से छू रहा हूं। फिर कुछ घंटों बाद रात को मैंने दोबारा पास वाली छत पर उसके पास अपना बिस्तर लगाकर उससे बातें करने लगा। हम दोनों हंसी मजाक कर रहे थे।
कुछ घंटों बाद की हंसी मजाक करने के बाद जब सभी लोग सो गए तो मैंने सही मौका देखकर उसे इशारा किया और उससे कहा कि तुम मेरे पीछे आ जाओ। मैं धीरे से उठकर सीढ़ियों की तरफ बढ़ने लगा। वो चुपचाप मेरे पीछे आ गई।
फिर मैं उसे अपने साथ नीचे ले गया और एक बिल्कुल अंधेरी सुरक्षित जगह देखकर मैं किस करने लगा। अंधेरा इतना गहरा था कि कुछ भी साफ दिखाई नहीं दे रहा था। मैंने उसे दीवार से सटा लिया। उसके होंठों पर अपने होंठ रखकर जोर से चूमने लगा। उसकी सांसें मेरे मुंह में घुल रही थीं।
फिर से उसकी पैंटी में हाथ डालकर चूत में उंगली करने लगा और अपने एक हाथ से उसके बूब्स को दबाने लगा। मेरी उंगलियां उसकी पहले से गीली चूत के अंदर घुस गईं। वो बहुत गर्म और चिपचिपी थी। मैंने दो उंगलियां अंदर बाहर करना शुरू कर दिया। उसके बूब्स मेरे हाथ में दब रहे थे।
कुछ देर बाद उसने मुझसे कहा कि यहां पर नहीं, एक रूम बिल्कुल खाली है और तुम मेरे साथ वहां पर चलो। उसकी आवाज में जल्दबाजी थी। मैंने उसका हाथ पकड़ लिया। हम दोनों चुपचाप उस रूम की तरफ बढ़े। रात का सन्नाटा चारों तरफ था।
फिर हम दोनों उस रूम में चले गए। मैंने दरवाजा खोलकर देखा तो वहां पर कोई भी नहीं था, बस एक बिस्तर पड़ा हुआ था। शायद वो हमारे लिए ही था। कमरे में हल्की सी चांदनी आ रही थी। बिस्तर साफ और नरम लग रहा था।
मैं उसे कुछ देर खड़े खड़े जोर से किस करते हुए बिस्तर पर ले गया और फिर उसके कपड़े उतारने लगा। मैंने उसकी कमीज के बटन खोल दिए। उसके स्तन अब मेरे सामने थे। वो भी अब तक बहुत गरम हो गई थी। उसकी सांसें बहुत तेज हो चुकी थीं।
अब मैं उसके गरम मुलायम बूब्स को दबाने और चूसने लगा और वो सिसकियां लेने लगी, सsssss ईईई आह्ह्ह्हह्ह। मैंने एक बूब को मुंह में लिया और जोर से चूसने लगा। उसका निप्पल मेरी जीभ पर फिसल रहा था। मैंने दूसरे बूब को हाथ से मसलना शुरू कर दिया। वो सिसकारियां ले रही थी, सsssss आह्ह्ह्ह उफ्फ्फ्फ।
फिर मैं धीरे से चूत की तरफ बढ़ने लगा और उसकी चूत को चाटने लगा। मैंने उसकी टांगें फैलाईं। उसकी चूत पूरी तरह गीली और फूली हुई थी। मैंने अपनी जीभ से उसके चूत के होठों को चाटना शुरू कर दिया। उसका स्वाद नमकीन और मीठा था।
बहुत देर बाद मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उसके मुंह में देने लगा। मेरा लंड पूरी तरह खड़ा और मोटा था। उसके मुंह के पास ले जाकर मैंने कहा कि इसे चूस। फिर वो मुझसे साफ मना कर रही थी। उसने अपना मुंह बंद कर लिया।
मैंने उसका सर जबरदस्ती पकड़ा और अपना लंड उसके बालों को खींचते हुए उसके मुंह में डाल दिया। उसके बाल मेरी मुट्ठी में थे। मैंने उसके सिर को आगे पीछे करना शुरू कर दिया। उसके मुंह में मेरा लंड घुस रहा था। वो पहले तो घुटने की कोशिश कर रही थी।
बहुत देर तक जबरदस्ती अपना लंड चुसाने के बाद अब वो खुद बहुत अच्छे से चूसने लगी। उसकी जीभ मेरे लंड के नीचे घूम रही थी। वो जोर जोर से चूस रही थी। उसके मुंह से थूक निकल रहा था। मेरा लंड उसकी गर्म सांसों में भीग रहा था।
अब उसने मुझसे कहा कि प्लीज आज तुम मेरी चूत की खुजली को अच्छी तरह से मिटा दो। उसकी आवाज में बहुत तड़प थी। मेरी तड़पती तरसती चूत को आज तुम पूरी तरह से शांत कर दो। वो मेरे लंड को चूसते हुए बोल रही थी।
फिर मैंने जोश में आकर उसको नीचे लेटा दिया और उसकी प्यासी चूत में लंड को डालने लगा। मैंने उसके पैर फैलाए। मेरा लंड उसकी गीली चूत पर रखा। मैं धीरे धीरे अपने लंड को आगे की तरफ धकेलने लगा तो वो बहुत जोर जोर से चिल्ला रही थी, आह्हhhhh उफ्फ्फ्फ आईईई। उसकी चूत बहुत तंग थी।
मुझे उसके चिल्लाने से ही पता लग रहा था कि वो कितनी प्यासी है। उसकी चूत मेरे लंड को अंदर खींच रही थी। मैंने धीरे से और जोर लगाया। उसका शरीर कांप रहा था। उसकी आंखें बंद थीं।
फिर मैंने उसके मुंह पर अपना एक हाथ रखकर उससे कहा कि प्लीज अब ज्यादा मत चिल्ला वरना कोई सुन लेगा। मैंने उसका मुंह ढक लिया। उसकी सिसकारियां अब मेरे हाथ के नीचे दब गईं। फिर वो कुछ शांत हो गई और हल्की हल्की सिसकियां लेने लगी। मैं अब लगातार अपने लंड को अंदर बाहर करता रहा और मुझे बहुत मजा आ रहा था।
लेकिन कुछ देर बाद उसने अपना पानी छोड़ दिया और फिर भी मैं उसे चोदता ही रहा।
फिर कुछ देर बाद मैं लंड को चूत से बाहर निकालकर उसकी गांड में डालने लगा तो वो बहुत जोर से चिल्लाने लगी। मैंने अपना लंड उसकी चूत से निकाला। वो चमकदार और गीला था। मैंने उसे उसकी गांड के छेद पर रखा। धीरे से दबाव डालने लगा।
उसने मुझसे कहा कि प्लीज इसे बाहर निकालो, प्लीज उफ्फ्फ मां आईईई मैं मर जाऊंगी, मुझे बहुत दर्द हो रहा है। उसकी आवाज में तेज दर्द था। उसके शरीर में जकड़न आ गई। वो अपने पैर पीछे खींचने लगी। मैंने थोड़ा रुककर उसका सर सहलाया।
लेकिन फिर भी मैं थोड़ा सा रुककर चुदाई करने लगा और कुछ देर बाद उसे भी मजा आने लगा था। मैंने धीरे धीरे लंड आगे बढ़ाया। उसकी गांड बहुत तंग थी। लंड अंदर घुसता गया। उसके मुंह से दर्द भरी सिसकारियां निकल रही थीं।
मैं अपनी चुदाई की स्पीड को बढ़ाने लगा था। अब लंड अंदर बाहर तेजी से हो रहा था। उसकी गांड की दीवारें मेरे लंड को कस रही थीं। वो अब दर्द के साथ साथ कुछ मजा भी लेने लगी थी। उसके शरीर में हल्की हल्की सनसनाहट दौड़ रही थी।
अब वो मुझसे कहने लगी कि प्लीज तुम अपना पानी मेरे मुंह में छोड़ देना, मुझे उसे चखकर भी देखना है। उसकी आवाज में तड़प थी। मैंने लंड को उसकी गांड से बाहर निकाला। वो चमक रहा था। फिर कुछ देर उसकी चुदाई करने के बाद फिर से अपने लंड को उसकी गांड से बाहर निकालकर उसके मुंह में दे दिया।
वो बहुत मजे लेकर चूसने लगी। उसकी जीभ मेरे लंड पर घूम रही थी। वो जोर जोर से चूस रही थी। उसके मुंह से थूक और मेरे रस की आवाज आ रही थी। मेरा लंड उसकी गर्म सांसों में भीग रहा था।
लेकिन कुछ देर बाद मैंने अपना गरम पानी उसके मुंह में छोड़ दिया और वो उसे बहुत मजे से चूसकर चाटकर गटक गई। मेरा गरम पानी उसके मुंह में फैल गया। उसने सब कुछ चाट लिया। उसके होंठ चमक रहे थे। उसने मुस्कुराते हुए सब गटक लिया।
थोड़ी देर तक उसकी चूत से खेलने के बाद फिर से मेरा लंड खड़ा हो गया और फिर मैंने उसे अपना लंड उसकी चूत में डालकर चोदना शुरू कर दिया। मैंने उसे पीठ के बल लिटाया। उसकी टांगें फैलाईं। मेरा लंड फिर से उसकी गीली चूत में घुस गया। कुछ देर के धक्कों के बाद मैंने अपनी पोजीशन बदल ली और अब मैं उसे डॉगी स्टाइल में चोदने लगा।
मैं उसके पीछे घुटनों के बल बैठ गया। उसकी गांड ऊपर उठा ली। मेरा लंड उसकी चूत में जोर जोर से घुस रहा था। उसके स्तन नीचे लटक रहे थे। मैं उसके कूल्हों को पकड़कर तेजी से धक्के मार रहा था।
बहुत देर तक लगातार धक्के देकर चुदाई करने के बाद मैंने उसकी गांड में दोबारा से अपना लंड घुसा दिया और जोर से धक्के देकर चोदने लगा। गांड अब पहले से ज्यादा खुल चुकी थी। लंड आसानी से अंदर जा रहा था। वो जोर जोर से चिल्लाने लगी। लेकिन मैं नहीं रुका।
अब मैंने उसके मुंह में अपना लंड देकर लेट गया और वो बहुत देर तक चूसती रही। मैं पीठ के बल लेट गया। उसने मेरा लंड मुंह में लिया। वो जोर जोर से चूस रही थी। उसकी जीभ हर जगह घूम रही थी।
अब उसने खुद कहा कि मेरी गांड में अपना लंड घुसा दो। उसकी आवाज में भूख थी। मैं फिर से ऊपर उठा। उसने खुद अपनी गांड ऊपर उठा ली। मैंने अपना लंड उसकी गांड के अंदर डालने लगा।
अब मैंने उसके दोनों पैरों को पूरे फैला दिए थे और साथ ही मैं उसकी चूत में उंगली भी कर रहा था। उसकी टांगें पूरी तरह खुल गईं। मेरा लंड गांड में जोर जोर से घुस रहा था। साथ ही मेरी उंगलियां उसकी चूत में अंदर बाहर हो रही थीं। उसके दोनों छेद भर चुके थे।
अब फिर से उसकी चूत का पानी निकल गया और अब उसे और भी मजा आने लगा था। उसका शरीर कांपने लगा। उसने जोर से सिसकारी ली। उसकी चूत मेरी उंगलियों पर छूट गई। वो पूरी तरह से झड़ चुकी थी।
फिर से मैं उसकी गांड में ही दूसरी बार झड़ गया और कुछ देर उसके पास थककर लेट गया। मेरा गरम पानी उसकी गांड में भर गया। मैं उसके ऊपर लेट गया। हम दोनों की सांसें बहुत तेज थीं। उसका शरीर अभी भी हल्का कांप रहा था।
फिर कुछ देर बाद मैंने उठकर अपने कपड़े पहने और टाइम देखा तो उस समय रात के करीब तीन बजकर पैंतालीस मिनट हो रहे थे। मैं ऊपर जाकर सो गया और कुछ देर बाद वो भी मेरे पास आकर लेट गई। मुझे पता ही नहीं चला कि कब सुबह हो गई थी।
दोस्तों, अब शादी को दो दिन और थे। लेकिन फिर से मैंने शादी के जागरण वाली रात को उसे एक बार फिर से बहुत जमकर चोदा। उस रात भी हमने छत पर ही मजे लिए। मैंने उसकी चुदाई करके उसके जिस्म के बहुत मजे लिए और उसने भी मुझसे मेरी चुदाई से खुश होकर मेरा हमेशा पूरा पूरा साथ दिया।
लेकिन शादी के दो दिन बाद मैं अपने घर पर आ गया। उस समय मैंने उससे मिलकर कहा कि मैं दोबारा जरूर आऊंगा और हम दोबारा चुदाई के ऐसे ही मजे लेंगे। अब मैं इंतजार कर रहा हूँ कि कब मैं फिर से अपने गांव जाऊंगा और फिर से उसकी चुदाई करूंगा। मैं अब भी उसकी चुदाई को याद करके कभी कभी मुठ मार लिया करता हूँ और मैं आज तक उस चुदाई को नहीं भुला सका हूँ।